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मोतियाबिंद की सर्जरी की जटिलताएं

हर साल लाखों-करोड़ों लोग सफलतापूर्वक मोतियाबिंद की सर्जरी करवाते हैं, और मोतियाबिंद की सर्जरी की जटिलताएं अपेक्षाकृत दुर्लभ होती हैं।

मोतियाबिंद की सर्जरी की संभावित जटिलताएं इस प्रकार हैं:

  • लेंस के पीछे धुंधलापन (पोस्टीरियर कैप्सूल ओपेसिटी, PCO)

  • लेंस का अपने स्थान से हट जाना (इंट्राऑकुलर लेंस डिसलोकेशन)

  • आंख में सूजन

  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता

  • फोटोप्सिया (प्रकाश की चौंध महसूस होना)

  • मैकुलर एडीमा (रेटिना के मध्य भाग में सूजन)

  • टोसिस (पलकों का लटक जाना)

  • ऑकुलर हायपरटेंशन (आंख में दबाव बढ़ना)

यदि मोतियाबिंद की सर्जरी की जटिलताएं होती भी हैं तो भी उनमें से अधिकतर मामूली होती हैं और उन्हें चिकित्सीय ढंग से या अतिरिक्त सर्जरी द्वारा ठीक किया जा सकता है।

लेंस के पीछे धुंधलापन (पोस्टीरियर कैप्सूल ओपेसिटी)

पोस्टीरियर कैप्सूल ओपेसिटी (जिसे पोस्टीरियर कैप्सूल ओपेसिफ़िकेशन या PCO भी कहते हैं) मोतियाबिंद की सर्जरी की सबसे आम जटिलताओं में से एक है।

हालांकि कुछ लोग PCO को "दूसरा मोतियाबिंद" कहते हैं, पर असल में यह कोई मोतियाबिंद नहीं है। मोतियाबिंद को एक बार हटा देने पर वह वापस नहीं आता है।

मोतियाबिंद की सर्जरी में, आपके सर्जन आपकी आंख के प्राकृतिक, पर धुंधले पड़ चुके लेंस (मोतियाबिंद) को हटा देते हैं और उसके स्थान पर एक इंट्राऑकुलर लेंस (IOL) लगा देते हैं।

इस सर्जरी के दौरान, प्राकृतिक लेंस के चारों ओर मौजूद पतली व पारदर्शी झिल्ली (जिसे लेंस कैप्सूल कहते हैं) को जानबूझ कर ज्यों-का-त्यों छोड़ दिया जाता है।

अधिकतर मामलों में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद लेंस कैप्सूल पारदर्शी बना रहता है। पर कुछ मामलों में, कैप्सूल का पीछे वाला भाग (जिसे ज्यों-का-त्यों छोड़ दिया गया था) धुंधला हो जाता है। कैप्सूल के पिछले भाग का यूं धुंधला पड़ना मोतियाबिंद सर्जरी के बाद स्वास्थ्य-लाभ की अवधि में या फिर महीनों बाद भी हो सकता है।

पोस्टीरियर कैप्सूल ओपेसिफ़िकेशन का उपचार

भाग्य से, YAG लेज़र कैप्सुलोटॉमी नामक सर्जरी से PCO को ठीक किया जा सकता है। इस सर्जरी में, धुंधले कैप्सूल के केंद्रीय भाग में एक छेद बना दिया जाता है जिससे दृष्टि तुरंत बहाल हो जाती है।

YAG लेज़र कैप्सुलोटॉमी में तीन चरण होते हैं:

  1. आई ड्रॉप का उपयोग पुतली को फैलाने के लिए करते हैं। इससे आपके अस्पताल वाले ऑफ्थैल्मोलॉजिस्ट पूरा लेंस कैप्सूल देख पाते हैं।

  2. लेज़र कोई भी चीरा लगाए बिना या आंख को छुए बिना, धुंधले पोस्टीरियर कैप्सूल को आपकी दृष्टि रेखा से हटा देता है।

  3. औषधियुक्त आई ड्रॉप का उपयोग सूजन की रोकथाम के लिए सर्जरी पूरी हो जाने के बाद किया जाता है।

इस सर्जरी में बस कुछ मिनट लगते हैं और बिल्कुल भी दर्द नहीं होता है।

YAG लेज़र कैप्सुलोटॉमी के बाद आप अपनी सामान्य गतिविधियां तुरंत बहाल कर सकते हैं। बाद में आपको कुछ फ़्लोटर का अनुभव हो सकता है। ये आमतौर पर कुछेक सप्ताह में चले जाते हैं।

अधिकांश लोगों की दृष्टि में एक दिन के अंदर ही सुधार हो जाता है। यदि लेज़र कैप्सुलोटॉमी के बाद आपकी दृष्टि और बदतर हो जाए या उसमें सुधार न हो तो अपने नेत्र देखभाल पेशेवर से तुरंत संपर्क करें।

चूंकि YAG लेज़र इंट्राऑकुलर लेंस के पीछे मौजूद धुंधले पोस्टीरियर कैप्सूल के केंद्रीय भाग को हटा देता है, अतः यह स्थिति दोबारा नहीं हो सकती है। इसलिए, मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद PCO के कारण हुई दृष्टि हानि को स्थायी तौर पर ख़त्म करने के लिए केवल एक बार लेज़र उपचार करवाना होता है।

YAG लेज़र कैप्सुलोटॉमी के जोख़िम

YAG लेज़र कैप्सुलोटॉमी से जटिलताएं होना दुर्लभ है। हालांकि, इस सर्जरी से रेटिनल डिटैचमेंट (रेटिना के अपनी जगह से अलग होने) का जोख़िम कुछ हद तक बढ़ सकता है।

शोध से संकेत मिलते हैं कि मोतियाबिंद की सर्जरी की जटिलता के कारण रेटिना के अपनी जगह से अलग होने का जीवन-पर्यंत जोख़िम लगभग 1 प्रतिशत है। यदि मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद YAG लेज़र कैप्सुलोटॉमी हुई हो तो यह जोख़िम बढ़ कर लगभग 2 प्रतिशत हो जाता है।

लेंस (IOL) का अपनी जगह से हटना

इंट्राऑकुलर लेंस (IOL) का अपनी जगह से हट जाना, मोतियाबिंद की सर्जरी की एक और संभावित जटिलता है। इससे दृष्टि संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें दोहरी दृष्टि शामिल है।.

लेंस (IOL) के अपनी जगह से हटने के मामले दुर्लभ होते हैं, पर यदि ऐसा हो जाए, तो आमतौर पर आपके मोतियाबिंद सर्जन सर्जरी द्वारा उसे वापस सही स्थान पर ला देते हैं। कुछ मामलों में, इंप्लांट (नए लेंस) को अपनी जगह स्थिर करने के लिए उसे टांकों से सीना पड़ता है, या फिर उसे हटा कर कोई अन्य IOL लगाया जाता है।

मोतियाबिंद की सर्जरी की अन्य जटिलताएं

मोतियाबिंद की सर्जरी की अन्य संभावित जटिलताओं में सूजन से लेकर विनाशकारी दृष्टि हानि तक शामिल हैं। गंभीर दृष्टि हानि का जोख़िम अत्यंत दुर्लभ है और आंख में संक्रमण या रक्तस्राव के फलस्वरूप हो सकता है।

मोतियाबिंद की सर्जरी की कुछ जटिलताएं, सर्जरी के बहुत समय बाद होती हैं।

उदाहरण के लिए, पूरी तरह सफल हुई मोतियाबिंद की सर्जरी के महीनों या सालों के बाद रेटिना अपनी जगह से अलग हो सकता है। यदि मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद कभी आपको अचानक से फ़्लोटर्स या प्रकाश की चौंध दिखने लगे (जो रेटिना के अपनी जगह से अलग होने के लक्षण हैं), तो अपने नेत्र देखभाल पेशेवर से तुरंत परामर्श करें।

मोतियाबिंद की सर्जरी की अन्य संभावित जटिलताओं में शामिल हैं:

यदि आपको मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद ये या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखें, तो मूल्यांकन और उपचार के लिए अपने नेत्र देखभाल पेशेवर से परामर्श करें।

मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद दृष्टि संबंधी समस्याएं

यदि आपको मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद धूप के प्रति संवेदनशीलता की कोई समस्या हो, तो फोटोक्रोमिक लेंस, जो यूवी किरणों के संपर्क में अपने-आप गहरा जाते हैं, वाले चश्मे से अकसर राहत मिल जाती है।

साथ ही, सर्जरी के बाद अवशेषी रिफ्रैक्टिव एरर (अपवर्ती त्रुटि) और प्रेसबायोपिया (उम्र बढ़ने के कारण दूरदृष्टिता) के लिए, एंटी-रिफ़्लेक्टिव कोटिंग वाले प्रोग्रेसिव लेंस रात में ड्राइविंग करने और पढ़ने जैसी गतिविधियों के लिए आपकी दृष्टि को अकसर पैना करने में सफल रहते हैं।

जिन लोगों की दृष्टि में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद भी सुधार नहीं होता है, उनमें अक्सर कोई अंदर छिपा नेत्र विकार होता है, जैसे आयु संबंधी मैकुलर डीजेनरेशनडायबिटिक रेटिनोपैथी और आंखों की अन्य अवस्थाएं।

नियमित आंखों की जांच आपकी आंखों के स्वास्थ्य और आपकी दृष्टि की स्पष्टता की निगरानी करने के लिए मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद बहुत ज़रूरी होती है।

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