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डिजिटल और कंप्यूटर आई स्ट्रेन के बारे में जानें

लंबे समय तक कंप्यूटर के उपयोग से महिलाएं आँखें मलना

ऐसा लगता है कि आजकल हर कोई एक कंप्यूटर स्क्रीन, फ़ोन या अन्य डिज़िटल उपकरण पर आँखें गड़ाए हुए है; और इसकी वजह से एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है जिसे डिजिटल आई स्ट्रेन कहते हैं।

हाल ही में विज़न काउंसिल द्वारा प्रायोजित एक शोध में यह बात सामने आई है कि नियमित रूप से कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने वाले 59 प्रतिशत लोग डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षणों का सामना करते हैं (इसे कंप्यूटर आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम भी कहते हैं)।

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम के लक्षणों में शामिल हैं: आँखों में थकान और असहजता महसूस होना, आँखों में सूखापन,सरदर्द, धुंधला दिखाई देना, गर्दन और कंधे में दर्द, आँखें फड़कना और आँखों में लाली.

यहाँ 10 आसान कदम बताए गए हैं जिनका पालन कर आप आई स्ट्रेन और कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम (सी.वी.एस.) का जोखिम घटा सकते हैं:

1. आँखों की संपूर्ण जाँच कराएँ।

नियमित रूप से आँखों की संपूर्ण जाँच कराना कंप्यूटर विज़न की समस्याओं की रोकथाम या उपचार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि आपने एक साल से अधिक समय से आँखों की जाँच नहीं कराई है, तो अपने आसपास एक ऑप्टिशियन से मुलाकात तय करें।.

आपकी जाँच के दौरान अपने नेत्र चिकित्सक को यह बताना सुनिश्चित करें कि आप काम और घर पर कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं। कंप्यूटर के सामने बैठते समय आपकी आँखों और स्क्रीन के मध्य की दूरी मापें, और यह माप अपनी जाँच के दौरान साथ लाएँ ताकि आपका नेत्र चिकित्सक उस विशिष्ट कार्य दूरी पर आपकी आँखों की जाँच कर सके।

2. समुचित प्रकाश का उपयोग करें।

आई स्ट्रेन अक्सर अत्यधिक तेज प्रकाश की वजह से होता है जो खिड़की के रास्ते आने वाली सूर्य की रोशनी या अंदरुनी प्रकाश परिस्थितियों के अत्यधिक कठोर होने की वजह से उत्पन्न होता है। कंप्यूटर का इस्तेमाल करते समय, आपके आसपास का प्रकाश की तीव्रता को ज्यादातर कार्यालयों के सामान्य प्रकाश की तुलना में आधा होना चाहिए।

पर्दे, शेड या ब्लाइंड बंद करके बाहरी प्रकाश को आने न दें। कम लाइट बल्बों या ट्यूबलाइटों को जलाकर भीतरी प्रकाश को घटाएँ, या कम तीव्रता वाले बल्बों और ट्यूबलाइटों का उपयोग करें।

साथ ही, अगर संभव हो, तो अपना कंप्यूटर स्क्रीन इस तरह रखें कि खिड़कियाँ उसके सामने या पीछे की तरफ न हों, बल्कि बगल की तरफ हों।

कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोग पाते हैं कि यदि वे सर के ऊपर लगी ट्यूबलाइट के नीचे काम करने से बचते हैं, तो उनकी आँखें बेहतर महसूस करती हैं। यदि संभव हो, तो अपने कार्यालय में ऊपर लगी लाइटों को बंद कर दें और ऐसे फ़्लोर लैंपों का इस्तेमाल करें जो अप्रत्यक्ष "हल्की सफेद" एलईडी रोशनी प्रदान करते हैं।

कभी-कभी "फ़ुल स्पेक्ट्रम" फ्लोरसेंट रोशनी, जो सूर्य के प्रकाश द्वारा उत्पन्न प्रकाश के स्पेक्ट्रम से अधिक मिलती-जुलती होती है, का इस्तेमाल करना कंप्यूटर के काम के लिए नियमित फ्लोरसेंट ट्यूबों से अधिक आरामदेह हो सकता है। लेकिन फ़ुल स्पेक्ट्रम रोशनी के बहुत उज्ज्वल होने से भी असहजता उत्पन्न हो सकती है।

यदि आप सर के ऊपर लगे प्रकाश से परेशान होते हैं, तो अपने कंप्यूटर कार्यस्थल पर लगी ट्यूबलाइटों की संख्या घटाने का प्रयास करें।

3. चमक को कम करें।

दीवारों और चिकनी सतहों पर प्रकाश के टकराने से पैदा होने वाली चमक, और आपके कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखने वाली परछाइयाँ भी कंप्यूटर आई स्ट्रेन का कारण बन सकती हैं। अपने डिस्प्ले पर एक चमक-रोधी (एंटी-ग्लेयर) स्क्रीन लगाने पर विचार करें और, अगर संभव हो, तो चमकदार सफेद दीवारों को मैट फ़िनिश वाले गहरे रंग से पेंट करें।

यदि आप चश्मा पहनते हैं, तो एंटी-रिफ़्लेक्टिव (एआर) कोटिंग युक्तलेंस खरीदें। एआर कोटिंग आपके चश्मे के लेंस की आगे और पीछे की सतहों से परावर्तित प्रकाश की मात्रा को घटाकर चमक को घटाती है।

4. अपने डिस्प्ले को अपग्रेड करें।

यदि आपने अब तक ऐसा नहीं किया है, तो अपने पुराने ट्यूब-स्टाइल के मॉनीटर (जिसे कैथोड रे ट्यूब या सीआरटी कहते हैं) की जगह एंटी-रिफ़्लेक्टिव सतह वाला एक फ़्लैट पैनल वाला एलईडी (लाइट एमिटिंग डायोड) स्क्रीन अपनाएँ।

पुराने सीआरटी स्क्रीन छवियों में उल्लेखनीय "झिलमिलाहट" पैदा कर सकते हैं, जो कंप्यूटर आई स्ट्रेन का प्रमुख कारण है। भले ही यह झिलमिलाहट महसूस न हो रही हो, यह तब भी कंप्यूटर पर काम करते समय आई स्ट्रेन और थकान में योगदान कर सकती है।

झिलमिलाहट से होने वाली समस्याओं की संभावना और भी बढ़ जाती है अगर मॉनीटर की रीफ्रेश दर 75 हर्ट्ज़ (Hz) से कम होती है। यदि आपको काम पर एक सीआरटी स्क्रीन का उपयोग करना ही पड़े तो डिस्प्ले सेटिंग को अधिकतम संभव रीफ्रेश दर पर सेट कर दें।

नया फ़्लैट पैनल वाला डिस्प्ले चुनते समय, ऐसा स्क्रीन चुनें जिसका रिज़ॉल्यूशन सर्वाधिक हो। रिज़ॉल्यूशन का संबंध डिस्प्ले के "डॉट पिच" से होता है। सामान्य तौर पर, कम डॉट पिच वाले डिस्प्ले अधिक स्पष्ट छवियाँ प्रदान करते हैं। ऐसे डिस्प्ले का चुनाव करें जिसकी डॉट पिच .28 mm या उससे कम हो।

साथ ही, एक अपेक्षाकृत बड़ा डिस्प्ले चुनें। डेस्कटॉप कंप्यूटर के लिए, ऐसा डिस्प्ले चुनें जिसके स्क्रीन का आकार ऊपर दायें कोने से नीचे बायें कोने तक कम से कम 19 इंच हो।

5. अपने कंप्यूटर की डिस्प्ले सेटिंग्स को समायोजित करें।

अपने कंप्यूटर की डिस्प्ले सेटिंग्स को समायोजित करने से आई स्ट्रेन और थकान कम करने में सहायता मिलती है। सामान्य तौर पर, निम्नलिखित समायोजन लाभदायक होते हैं:

  • चमक (ब्राइटनेस)

    डिस्प्ले की चमक को इस तरह समायोजित करें कि वह आपके कार्यस्थल की चमक के लगभग बराबर रहे। जाँचने के लिए, इस वेबपेज के सफेद बैकग्राउंड को देखें। यदि यह प्रकाश के स्रोत की तरह लगता है, तो यह बहुत चमकदार है। यदि यह मंद और धुंधला लगता है, तो यह बहुत अंधकारमय है।

  • टेक्स्ट का आकार और कंट्रास्ट

    टेक्स्ट के आकार और कंट्रास्ट को अपनी सुविधा के अनुसार समायोजित करें, खास तौर से तब, जब आप लंबे डॉक्यूमेंट पढ़ या बना रहे हों। सामान्य तौर पर, एक सफेद बैकग्राउंड के ऊपर काला प्रिंट सर्वाधिक आरामदायक संयोजन होता है।

  • रंग तापमान

    यह एक तकनीकी शब्द है जिसका तात्पर्य एक रंगीन डिस्प्ले से निकले व आँखों को दिखने वाले प्रकाश के स्पेक्ट्रम से होता है। नीला प्रकाश छोटे तरंगदैर्ध्य वाला प्रकाश होता है जिसे आँखें देख सकती हैं और माना जाता है कि नारंगी और लाल जैसे अपेक्षाकृत लंबे तरंगदैर्ध्यों की तुलना में, नीला प्रकाश आई स्ट्रेन के लिए अधिक जिम्मेदार है। आपके डिस्प्ले का रंग तापमान घटाने से रंगीन डिस्प्ले से निकलने वाले नीले प्रकाश की मात्रा घट जाती है जो स्क्रीन को लंबे समय तक देखने पर आराम सुनिश्चित करता है।

6. पलके ज्यादा झपकाएँ।

कंप्यूटर पर काम करते समय पलकें झपकाना बहुत महत्वपूर्ण होता है; पलकें झपकाने से आपकी आँखें नम होती हैं जिससे सूखेपन और जलन से उनका बचाव होता है।

अध्ययनों के अनुसार, एक स्क्रीन को लगातार देखते समय, लोग पलकें कम झपकाते हैं — वे सामान्य की तुलना में केवल एक-तिहाई बार ही पलकें झपकाते हैं — और कंप्यूटर पर काम करने के दौरान बहुत बार पलकें केवल आंशिक रूप से ही बंद होती हैं।

आँखों में आँसुओं की परत पलकें नहीं झपकाने के दौरान तेजी से वाष्पीकृत होती है और इसकी वजह से आँखों में सूखापनआ सकता है। साथ ही बहुत से कार्य परिवेशों की हवा शुष्क हो सकती है, जो आपके आँसुओं की वाष्पीकरण दर को बढ़ा सकती है, जिसकी वजह से आपको आँखों की समस्याएँ होने का जोखिम बढ़ जाता है।

यदि आपको आँखों में सूखेपन के लक्षण दिखाई देते हैं, तो अपने ऑप्टिशियन से दिन में उपयोग करने के लिए कृत्रिम आँसुओं के बारे में पूछें।

ध्यान रखें कि आँखें नम करने वाले ड्रॉप और "लालपन को दूर करने वाले" ड्रॉप के मध्य अंतर होता है। दूसरा वाला ड्रॉप निश्चित ही आपकी आँखें दिखने में बेहतर बनाता है — इसमें ऐसे घटक होते हैं जो आपकी आँखों की सतह पर रक्त वाहिकाओं का आकार घटाकर उन्हें "सफेद" कर देते हैं। लेकिन उन्हें अनिवार्य रूप से सूखापन और जलन कम करने के लिए नहीं बनाया जाता।

कंप्यूटर का उपयोग करते समय आँखो के सूखेपन का जोखिम कम करने के लिए, यह व्यायाम करें: हर 20 मिनट में, अपनी पलकें 10 बार इस तरह झपकें जैसे आपको नींद आ रही हो (बहुत धीरे)। इससे आपकी आँखें पुनः गीली करने में सहायता मिलेगी।

7. अपनी आँखों का व्यायाम करें।

कंप्यूटर आई स्ट्रेन का एक अन्य कारण फ़ोकस से होने वाली थकावट है। अपने स्क्रीन पर लगातार फ़ोकस करने की वजह से आपकी आँखों को होने वाली थकावट का जोखिम घटाने के लिए, कम से कम प्रत्येक 20 मिनट में अपनी नज़रें कंप्यूटर से हटा लें और किसी दूर की वस्तु (कम से कम 20 फुट दूर) को कम से कम 20 सेकंड के लिए निहारें। कुछ ऑप्टिशियन इसे "20-20-20 का नियम" कहते हैं। दूर देखने से आँखों की फ़ोकस करने वाली पेशियों को आराम मिलता है जिससे थकावट कम होती है।

एक अन्य व्यायाम यह है कि किसी दूर की वस्तु को 10-15 सेकंड के लिए देखें, फिर किसी पास की वस्तु को 10-15 सेकंड के लिए देखें। इसके बाद दूर की वस्तु को पुनः देखें। यह प्रक्रिया 10 बार दोहराएँ। यह व्यायाम अधिक समय तक कंप्यूटर पर काम करने के बाद आपकी आँखों की फ़ोकस करने की क्षमता के "लॉक अप" (अकोमोडेटिव स्पाज़्म नामक एक अवस्था) हो जाने के जोखिम को कम करता है।

ये दोनों व्यायाम आपको कंप्यूटर आई स्ट्रेन होने का जोखिम घटाएँगे। साथ ही, कंप्यूटर से संबंधित आँखों के सूखेपन का जोखिम कम करने के लिए व्यायामों के दौरान अपनी पलकें जल्दी-जल्दी झपकाना याद रखें।

8. जल्दी-जल्दी विराम लें।

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम और गले, पीठ और कंधे के दर्द का जोखिम कम करने के लिए, अपने दिन भर के काम के दौरान स्क्रीन से जल्दी जल्दी विराम लें (प्रत्येक घंटे में कम से कम एक 10 मिनट का विराम)।

तनाव और पेशियों की सुस्ती घटाने के लिए, इन विरामों के दौरान, सीधे खड़े हों, चहलकदमी करें और अपनी बाँहों, पैरों, पीठ, गर्दन और कंधों को खींच कर सीधा करें।

9. अपनी डेस्क में बदलाव करें।

यदि आपको छपे हुए पन्ने और अपने कंप्यूटर स्क्रीन के बीच आगे-पीछे देखने की ज़रूरत पड़ती है, तो इन पन्नों को अपनी स्क्रीन के बग़ल में एक कॉपी स्टैंड पर रखें।

कॉपी स्टैंड को समुचित रूप से प्रकाशित करें। आप एक डेस्क लैंप का उपयोग भी कर सकते हैं, लेकिन सुनिश्चित करें कि वह आपकी आँखों या आपके कंप्यूटर की स्क्रीन पर न चमके।

खराब शारीरिक मुद्रा भी कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम में योगदान करती है। अपनी डेस्क और कुर्सी को सही ऊँचाई पर समायोजित करें ताकि आपके पैर फर्श पर आराम से रहें।

अपनी कंप्यूटर स्क्रीन को इस तरह रखें कि वह आपकी आँखों से 20 से 24 इंच की दूरी पर हो। आपके सर और गर्दन की आरामदायक मुद्रा के लिए आपके स्क्रीन का केंद्र सदैव आपकी आँखों से लगभग 10 से 15 अंश नीचे होना चाहिए।

10. कंप्यूटर चश्मा अपनाएँ।

अपने कंप्यूटर के सामने सर्वाधिक आराम के लिए, आप अपने ऑप्टिशियन से आपके चश्मे के प्रिस्क्रिप्शन में बदलाव करके आपके अनुसार कंप्यूटर चश्माबनाने को कह सकते हैं। यह विशेष रूप से तब लागू होता है, यदि आप सामान्य तौर पर कॉन्टैक्ट लेंसलगाते हैं, जो स्क्रीन पर लंबा समय बिताने के दौरान सूख सकते हैं और असहज महसूस हो सकते हैं।

यदि आप बाइफ़ोकल या प्रोग्रेसिव लेंसलगाते हैं, तब भी कंप्यूटर चश्मा एक अच्छा विकल्प है क्योंकि ये लेंस आपकी कंप्यूटर स्क्रीन की दूरी के अनुकूल नहीं होते।

साथ ही, आप कंप्यूटर आईवियर के रूप में फ़ोटोक्रोमैटिक लेंस या हल्के टिंटेड लेंस पर विचार कर सकते हैं जो डिजिटल डिवाइसों से निकलने वाले संभावित रूप से हानिकारक नीले प्रकाश से संपर्क का जोखिम घटाते हैं। विवरण और सलाह के लिए अपने ऑप्टिशियन से बात करें।

क्या आप कंप्यूटर आई स्ट्रेन महसूस कर रहे हैं? अपने घर के पास ऑप्टिशियन को खोजें.

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