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डायबेटिक रेटिनोपैथी के लक्षण क्या हैं

सूरजमुखी की छवि पर मधुमेह रेटिनोपैथी के प्रभाव

डायबेटिक रेटिनोपैथी डायबिटीज़ की वजह से आँख के रेटिना को होने वाला नुकसान है। 2019 में, मधुमेह वाले वयस्कों की सबसे बड़ी संख्या वाले तीन देश चीन, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ (IDF) मधुमेह एटलस 2019 संस्करण के अनुसार:

  • मधुमेह (352 मिलियन लोगों) के साथ रहने वाले तीन चार लोग कामकाजी उम्र के हैं (यानी 20 से 64 साल के बीच)। यह संख्या 2030 तक बढ़कर 417 मिलियन और 2045 तक 486 मिलियन होने की उम्मीद है।

  • 2019 में, मधुमेह के साथ 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की अनुमानित संख्या 111 मिलियन है। इस आयु वर्ग के पांच वयस्कों में से एक को मधुमेह होने का अनुमान है। 2030 तक, मधुमेह वाले 65 से अधिक लोगों की संख्या बढ़कर 195 मिलियन हो जाएगी।

  • डायबिटीज़ से ग्रस्त हर 2 में 1 व्यक्ति (232 करोड़ व्यक्ति) अपनी बीमारी से अनजान था।

  • भारत में, 77 मिलियन लोगों को मधुमेह होने का अनुमान है। यह संख्या 2030 तक बढ़कर 101 मिलियन और 2045 तक 132 मिलियन होने की उम्मीद है।

इन तथ्यों और आंकलनों के चलते, डायबेटिक रेटिनोपैथी जल्द ही एक प्रमुख विश्वव्यापी स्वास्थ्य संकट बन सकता है।  

टाइप 2 डायबिटीज़ के जोखिम कारकों में मोटापा, अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक निष्क्रियता शामिल हैं।

सामान्य तौर पर, डायबिटीज़ से ग्रस्त लोगों में डायबेटिक रेटिनोपैथी तभी विकसित होता है जब उनको डायबिटीज़ होकर कम से कम 10 साल हो चुके होते हैं। लेकिन आँखों की जाँच कराने के लिए इतने लंबे समय प्रतीक्षा करना समझदारी की बात नहीं होगी।

यदि आपको डायबिटीज़ का खतरा है या आपमें इस बीमारी की पहचान हुई है, तब यह महत्वपूर्ण है कि आप आँखों की संपूर्ण जाँच के लिए अपने ऑप्टिशियन से प्रति वर्ष मिलें। कुछ मामलों में, आपके रेटिना के स्वास्थ्य की निगरानी करने के उद्देश्य से, आपका ऑप्टिशियन अधिक जल्दी-जल्दी जाँचों का सुझाव दे सकता है।

डायबिटीज़ से डायबेटिक रेटिनोपैथी कैसे होता है?

डायबिटीज़ मेलिटस (डीएम) रक्त शर्करा (ग्लूकोज) में, जिसे विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए साधारण तौर पर आपका शरीर ऊर्जा में बदलता है, असामान्य बदलाव करता है।

अनियंत्रित डायबिटीज़ की वजह से आम तौर पर रक्त वाहिकाओं में रक्त शर्करा की उच्च मात्रा (हाइपरग्लाइसिमिया) इकट्ठा हो जाती है, जिसकी वजह से होने वाली क्षति आपके शरीर के अंगों में रक्त प्रवाह को बाधित या परिवर्तित करती है, जिसमें आपकी आँखें भी शामिल हैं।

डायबिटीज़ के दो प्रमुख प्रकार होते हैं:

टाइप 1 डायबिटीज़

इंसुलिन एक प्राकृतिक हार्मोन है जो आपके शरीर को "आहार" देने में सहायता करने के लिए आवश्यक होता है। जब आपको टाइप 1 डायबिटीज़ होने की पुष्टि की जाती है, तब आपको इंसुलिन पर निर्भर माना जाता है क्योंकि आपको इंसुलिन की आपूर्ति के लिए इन्जेक्शन या अन्य दवाइयों की आवश्यकता होती है, जिसे आपका शरीर खुद बनाने में असमर्थ होता है। जब आपके शरीर में अपने आप पर्याप्त इंसुलिन का निर्माण नहीं होता, तो आपकी ग्लूकोज अनियंत्रित हो जाती है और इसका स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है।

टाइप 2 डायबिटीज़

जब आपको टाइप 2 डायबिटीज़ होने की पुष्टि की जाती है, तब आपको आम तौर पर गैर-इंसुलिन-निर्भर या इंसुलिन-प्रतिरोधी माना जाता है। इस प्रकार के डायबिटीज़ में, आप पर्याप्त इंसुलिन का निर्माण करते हैं, लेकिन आपका शरीर इसका समुचित उपयोग करने में अक्षम होता है। फिर इसकी भरपाई के लिए आपका शरीर और भी अधिक इंसुलिन का निर्माण करता है, जिसकी वजह से रक्त में शुगर स्तर असामान्य रूप से बढ़ सकता है।

दोनों प्रकार के डायबिटीज़ में, रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि डायबेटिक रेटिनोपैथी होने का जोखिम बढ़ा देती है।

आँखों को क्षति तब होती है, जब रक्त शर्करा का दीर्घकालिक उच्च स्तर आँख के रेटिना की रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध करना या उन्हें क्षति पहुँचाना शुरू करता है। रेटिना में प्रकाश के प्रति संवेदनशील कोशिकाएँ (फ़ोटोरिसेप्टर) होते हैं, जोअच्छी दृष्टि के लिए आवश्यक होते हैं।

मधुमेह रेटिनोपैथी और अन्य मधुमेह नेत्र रोग के लक्षण

डायबेटिक रेटिनोपैथी (डीआर) और डायबिटीज़ जनित आँख की अन्य बीमारी के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • घटती-बढ़ती दृष्टि

  • आई फ़्लोटर और धब्बे

  • आपके दृष्टि क्षेत्र में स्कोटोमा या परछाईं का विकास

  • धुंधली और/या विकृत दृष्टि

  • कॉर्निया संबंधित विकार जैसे कॉर्निया में घर्षण के कारण घावों का धीमी गति से भरना

  • दोहरी दृष्टि

  • आँखों में दर्द

  • िकट दृष्टि की समस्याएँ जिनका संबंध जरा दूरदृष्टि (प्रेसबायोपिया) से नहीं है

  • मोतियाबिंद

आँखों की जाँच के दौरान, आपका नेत्र चिकित्सक डायबेटिक रेटिनोपैथी और डायबिटीज़ संबंधित आँख की बीमारी के अन्य संकेतों को खोजने का प्रयास करेगा। रेटिना को होने वाली क्षति के संकेतों में सूजन, रक्तस्राव या रक्त वाहिकाओं से द्रव पदार्थों के रिसाव का निक्षेप और प्रमाण शामिल हो सकते हैं।

आपका नेत्र चिकित्सक कैमरे या अन्य इमेजिंग उपकरण से आपके रेटिना की तस्वीर लेगा और डायबिटीज़ से जुड़ी क्षतियों के प्रत्यक्ष संकेतों को खोजेगा। कुछ मामलों में वह अतिरिक्त जाँच और संभावित उपचार के लिए आपको एक रेटिना विशेषज्ञ के पास भेज सकता है।

बीमारी की निर्णायक पुष्टि के लिए, आपको एक जाँच से गुजरना पड़ सकता है जिसे फ़्लोरोसीन एंजियोग्राफ़ी कहते हैं इस जाँच में आपकी बाँहों की शिराओं में एक डाई का इंजेक्शन लगाया जाता है और यह डाई धीरे-धीरे रेटिना की रक्त वाहिकाओं में पहुँचती है, जहाँ पर यह प्रकाशित होकर डायबिटीज़ की वजह से रक्त वाहिकाओं में होने वाले बदलावों और रेटिना में रक्त के रिसाव की पहचान करती है।

डायबिटीज़ जनित आँख की बीमारी एक लक्षण जिसे अक्सर नज़रंदाज़ कर दिया जाता है, वह है आँखों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली नेत्र-पेशियों को प्रभावित करने वाली स्नायु क्षति (न्यूरोपैथी)। इसके लक्षणों में आँखों की अनैच्छिक गतिविधि (अक्षिदोलन) और दोहरी दृष्टि शामिल हो सकते हैं।

डायबिटीज़ जनित आँख की बीमारी के लक्षण

रक्त शर्करा के उच्च स्तर द्वारा रेटिना की रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुँचाने की वजह से, उनसे द्रव पदार्थ या रक्त का रिसाव हो सकता है। इसके चलते डायबेटिक रेटिनोपैथी की शुरुआती अवस्थाओं में रेटिना में सूजन आ जाती है और निक्षेप जमा हो जाते हैं।

बाद की अवस्थाओं में, आँख के साफ, जेली जैसे विट्रियस में रक्त वाहिकाओं से होने वाला रिसाव दृष्टि में गंभीर समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है और अंततोगत्वा अंधेपन का कारण बन सकता है।

डायबेटिक मैक्युलर एडिमा

मैक्युला की इस सूजन को आम तौर पर टाइप 2 डायबिटीज़ से जोड़ा जाता है। मैक्युलर एडिमा घटी हुई या विकृत दृष्टि का कारण बन सकता है।

डायबेटिक मैक्युलर एडिमा (डीएमई) को आम तौर पर दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

  • फ़ोकल, जो माइक्रोएन्यूरिज़्म या रिसती रक्त वाहिकाओं के साथ होने वाली अन्य संवहनी संबंधित विषमताओं के कारण होता है।

  • डिफ़्यूज़, जिसका तात्पर्य रेटिना के भीतर फैली या सूजी हुई छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं (केशिकाओं) से होता है।

नॉन-प्रोलिफ़रेटिव डायबेटिक रेटिनोपैथी (एनपीडीआर)

डीआर की यह शुरुआती अवस्था — जो रेटिना में जमा होने वाले निक्षेपों से पहचानी जाती है — डायबिटीज़ से ग्रस्त होने के बाद कभी भी हो सकती है।

अक्सर कोई दृष्टि संबंधी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन रेटिना की जाँच में छोटे-छोटे डॉट एंड ब्लॉट हैमरेज प्रकट हो सकते हैं, जिन्हें माइक्रोएन्युरिज़्म के नाम से जाना जाता है, जिसका तात्पर्य एक प्रकार के छोटी रक्त वाहिकाओं के बहिर्वलन से होता है।

टाइप 1 डायबिटीज़ में, आम तौर पर ये शुरुआती लक्षण बीमारी की पुष्टि के बाद तीन-चार साल गुजरने से पहले दिखाई नहीं देते हैं। टाइप 2 डायबिटीज़ में, एनपीडीआर बीमारी की पहचान के समय भी मौजूद हो सकता है।

प्रोलिफ़रेटिव डायबेटिक रेटिनोपैथी (पीडीआर)

डायबिटीज़ जनित आँख की बीमारियों में, दृष्टिहीनता का सर्वाधिक खतरा प्रोलिफ़रेटिव डायबेटिक रेटिनोपैथी से होता है।

पीडीआर के निम्नलिखित संकेत होते हैं:

  • ऑप्टिक तंत्रिका और विट्रियसपर और आसपास असामान्य रक्त वाहिकाओं का विकास (नव-वाहिका निर्माण या नियोवैस्कुलराइज़ेशन)।

  • प्री-रेटिनल हैमरेजजो विट्रियस ह्यूमर में या रेटिना के आगे होता है।

  • घटे हुए या अवरोधित रक्त प्रवाह के कारण इस्केमिया, साथ ही एक स्वस्थ रेटिना के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की कमी।

नव वाहिका निर्माण की प्रक्रिया से बनीं ये असामान्य रक्त वाहिकाएँ टूट जाती हैं और इनसे आँख के विट्रियस ह्यूमर में रक्त का रिसाव करती हैं। अचानक दृष्टिहीनता के अलावा, अधिक स्थायी जटिलताओं में ट्रैक्शनल रेटिनल डिटैचमेंट और नियोवैस्कुलर ग्लूकोमा.

मैक्युलर एडिमा एनपीडीआर या पीडीआर के साथ या इनके बिना हो सकता है।

आपकी नियमित निगरानी की जानी चाहिए, हालाँकि डायबिटीज़ जनित आँख की बीमारी के उन्नत अवस्था में पहुँचने तक आपको लेज़र उपचार की आवश्यकता नहीं होती।

डायबेटिक रेटिनोपैथी किसे होता है?

डायबिटीज़ की मौजूदगी के अलावा, आपकी रक्त शर्करा कितना नियंत्रित है, यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि आपमें दृष्टिहीनता के साथ डायबेटिक रेटिनोपैथी विकसित होने की कितनी संभावना है।

अनियंत्रित उच्च रक्त चाप (हाइपरटेंशन) का संबंध डायबिटीज़ से आँख को होने वाली क्षति से पाया गया है। साथ ही, अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जब डायबिटीज़ से ग्रस्त महिलाएँ गर्भवती हो जाती हैं, तब उनमें डायबेटिक रेटिनोपैथी की प्रगति की दर बढ़ जाती है।

यह बात स्पष्ट है कि आपको डायबिटीज़ जितने अधिक समय से है, आपको दृष्टिहीनता होने की संभावना भी उतनी अधिक होती है। डायबिटीज़ से ग्रस्त लगभग सभी मरीजों में, जिनको बीमारी हुए लंबा समय हो चुका है, अंततोगत्वा कुछ हद तक डायबेटिक रेटिनोपैथी विकसित हो जाता है, हालाँकि यह आवश्यक नहीं है कि आँख की बीमारी की कम उन्नत अवस्थाओं से दृष्टिहीनता हो सकती है।

याद रखें: आँखों की नियमित जाँचें डायबेटिक रेटिनोपैथी और अन्य डायबिटीज़ जनित आँख की बीमारियों के कारण होने वाली दृष्टिहीनता से बचने का सर्वश्रेष्ठ तरीका हैं।

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