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कलेज़ियन (पलकों में गिलटी): कारण और उपचार (पलकों में उभार)

कलेज़ियन आपकी पलक पर मौजूद एक दर्दहीन उभार होता है। यह ऊपरी या निचली पलक को प्रभावित कर सकता है।

कलेज़िया (कलेज़ियन का बहुवचन) ठीक हो चुकी अंदरूनी स्टाई , जो अब संक्रामक नहीं होती, का परिणाम होते हैं। पलकों के ये गिलटी जैसे उभार पलक के अंदर की किसी तैल ग्रंथि के इर्द-गिर्द बनते हैं और इनके कारण पलकें लाल हो जाती हैं, और सूज जाती हैं.

कलेज़ियन के अंदर मवाद और अवरुद्ध वसीय स्राव (लिपिड) होते हैं जो सामान्यतः आंख को चिकनाहट दिया करते थे पर अब वे बाहर निकल नहीं पाते हैं।

कई कलेज़िया बह कर अपने-आप ठीक हो जाते हैं। आप अपनी पलक की गुनगुनी सिकाई करके इस प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं। हल्के हाथों से पलक की मालिश से भी मदद मिलती है।

पर कुछ कलेज़िया कई सप्ताह से भी अधिक तक बने रहते हैं और इतने बड़े हो जाते हैं कि वे व्यक्ति की सुंदरता में बट्टा लगाने लगते हैं।

बडे़ आकार का कलेज़ियन कॉर्निया पर दबाव डाल सकता है, जिससे अस्थायी तौर पर एस्टिग्मेटिज़्म (दृष्टि विषमता) और धुंधली दृष्टि जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

कलेज़ियन का कारण क्या है?

यह जानना प्रायः असंभव होता है कि कलेज़ियन किस कारण होता है। इसके जोख़िम कारकों में ब्लेफेराइटिस (पलकों की सूजन) और रोज़ेशिया (चेहरे की रक्त वाहिकाओं का बढ़ना) शामिल हैं।

रोज़ेशिया से ग्रस्त लोगों — जिनमें चेहरे की लालिमा और त्वचा के नीचे सूजे उभार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं — में ब्लेफेराइटिस और कलेज़िया जैसी नेत्र समस्याएं होने की संभावना अधिक होती है।

रोज़ेशिया पलकों को, आंखों की पतली बाहरी झिल्ली (कंजंक्टाइवा) को, आंख की पारदर्शी सतह (कॉर्निया) को, और आंख के सफ़ेद भाग (स्क्लेरा) को प्रभावित कर सकता है.

रोज़ेशिया जो आंख और आस-पास के ऊतकों को प्रभावित करता है उसे ऑकुलर रोज़ेशिया कहते हैं.

खुद रोज़ेशिया के कारणों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है, हालांकि परिवेश और वंशानुगत प्रवृत्तियां इसके संभावित कारक हैं। बरौनियों की जड़ों में या उनके पास रहने वाले कुछ सूक्ष्मजीव भी आंख के आस-पास की सूजन और बढ़ा सकते हैं।

कलेज़ियन का उपचार कैसे होता है?

यदि आपको कलेज़ियन हो जाए, तो आपकी पलकों पर मौजूद इस परेशान करने वाले उभार से छुटकारा पाने का सर्वोत्तम तरीका जानने के लिए किसी नेत्र देखभाल पेशेवर को दिखाएं।

आंखों की जांच करवानी है? अपने पास कोई नेत्र देखभाल पेशेवर ढूंढें और अपॉइंटमेंट तय करें।

आपके नेत्र देखभाल पेशेवर आपकी पलक की गुनगुनी सिकाई करने के तरीके के बारे में निर्देश देने के साथ-साथ, पलक के इस उभार से छुटकारा पाने के लिए उस पर लगाने की कोई दवा भी लिख सकते हैं। यदि आप में ब्लेफेराइटिस होने की संभावना अधिक है, तो आपको आपकी पलकों की नियमित सफाई करने के निर्देश भी मिल सकते हैं। कुछ मामलों में, कलेज़िया होने के जोख़िम कारकों को घटाने के लिए मुंह से ली जाने वाली दवाएं भी सुझाई जा सकती हैं।

ब्लेफेराइटिस और मेबोमियन ग्लैंड डिसफ़ंक्शन के लिए सबसे अधिक लिखी जाने वाली मुखीय दवाएं डॉक्सीसाइक्लिन जैसी एंटीबायोटिक होती हैं।

कलेज़िया के प्रत्यक्ष उपचार के रूप में लगाने और खाने के एंटीबायोटिक आमतौर पर अप्रभावी होते हैं क्योंकि इस स्थिति में ऐसा कोई सक्रिय संक्रामक घटक होता ही नहीं है जिसे इस प्रकार की दवाओं की ज़रूरत हो।

संभव है कि पलकों पर छोटे-छोटे, आसानी से न दिखने वाले उभारों को किसी भी उपचार की आवश्यकता ही न पड़े। हालांकि, कलेज़िया को जन्म देने वाले कुछ अवरोध अपने-आप नहीं खुलते हैं। इसके कारण, पलकों के उभार हठी बन सकते हैं या उनका आकार भी बढ़ सकता है।

परेशान करने वाले हठी कलेज़ियन के मामले में, आपके नेत्र देखभाल पेशेवर उसकी छंटाई के लिए एक छोटी सी सर्जरी सुझा सकते हैं जिसे वहीं उनके क्लीनिक में किया जा सकता है।

नेत्र सर्जन लोकल एनेस्थेसिया का उपयोग करके उस स्थान को सुन्न कर देते हैं और उसके बाद एक छोटा सा चीरा लगाते हैं जो आमतौर पर पलक के नीचे से लगाया जाता है, जिससे पलक के उभार के अंदर भरा पदार्थ बाहर निकल जाता है और कोई दिखने लायक घाव का निशान भी नहीं बनता है।

एक वैकल्पिक कार्यविधि में आपकी पलक के उभार से छुटकारा पाने के लिए कलेज़ियन में कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इंजेक्शन लगाया जाता है। स्टेरॉइड इंजेक्शन का एक संभावित दुष्प्रभाव यह है कि आस-पास की त्वचा का रंग हल्का पड़ जाता है, जो गहरी रंगत वाली त्वचा वाले लोगों के लिए अधिक बड़ी समस्या हो सकता है।

जिन मामलों में पलक के उसी भाग में दोबारा कलेज़ियन हो जाता है या उसका रंग-रूप संदिग्ध होता है, तो हटाए गए ऊतक को किसी प्रयोगशाला भेजा जाता है ताकि कैंसरकारी वृद्धि की संभावना को ख़ारिज किया जा सके। भाग्य से, पलकों के अधिकांश उभार सुदम्य और अहानिकर होते हैं।

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