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कॉर्नियल अल्सर: कारण और उपचार

कॉर्नियल अल्सर आमतौर पर दर्द के साथ आंख लाल होने के रूप में होता है, जिसमें आंख से हल्के से गंभीर स्तर का स्राव निकलता है और दृष्टि घट जाती है।

यह स्थिति कॉर्नियाके किसी स्थानीकृत संक्रमण से उत्पन्न होती है जो किसी फोड़े जैसा होता है।

कॉर्नियल अल्सर के कारण

कॉर्नियल अल्सर के अधिकतर मामले एक जीवाणु संक्रमण के कारण होते हैं जो कॉर्निया में — अक्सर आंख की चोट, आघात या अन्य क्षति के बाद घुसपैठ करता है।

कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग आंखों में जलन व खुजली के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं जो बढ़ कर कॉर्नियल अल्सर का रूप ले सकती है। ऐसा संभव है कि कॉन्टैक्ट लेंस आंंख की सतह से रगड़ खा कर एपिथिलियम को थोड़ी क्षति पहुंचा दे जिससे जीवाणु को आंख में घुसने का मार्ग मिल जाए।

यदि आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो आप कॉर्नियल अल्सर से बचने की अपनी संभावना को उत्तम स्वच्छता व्यवहार में ला कर बढ़ा सकते हैं, जैसे लेंसों की हैंडलिंग से पहले अपने हाथों को धोना और अन्य सुरक्षा सुझावों का पालन करना.

कॉर्नियल अल्सर के कारणों में जीवाणु संक्रमण के अलावा कवक और परजीवी भी शामिल हैं, जैसे:

  • फ़्यूसेरियम। इस कवक का संबंध कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले और एक ख़ास किस्म का कॉन्टैक्ट लेंस घोल प्रयोग करने वाले लोगों में फंगल केराटाइटिस के प्रकोप के साथ पाया गया है। अब बाज़ार से वापस लिया जा चुका यह कॉन्टैक्ट लेंस घोल पूर्व में इस प्रकार के संक्रमण को रोकने में विफल रहा था।

  • अकांथअमीबा। ये आम परजीवी आंख में प्रवेश करके अकांथअमीबा केराटाइटिसउत्पन्न कर सकते हैं, जो एक बहुत ही गंभीर नेत्र संक्रमण है जिससे कॉर्निया में स्थायी रूप से घाव के निशान पड़ सकते हैं और दृष्टि हानि हो सकती है। अकांथअमीबा सूक्ष्मजीव आमतौर पर नल के पानी में, स्विमिंग पूल में, हॉट टब में, और अन्य जल स्रोतों में पाए जाते हैं।

    कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले जो लोग तैरने से पहले अपने लेंस नहीं उतारते हैं उनमें अकांथअमीबा केराटाइटिस के कारण कॉर्नियल अल्सर होने का जोख़िम काफ़ी बढ़ जाता है। ("क्या आप कॉन्टैक्ट लेंस पहन कर तैराकी कर सकते हैं?" नामक लेख में कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले ऐसे लोगों के लिए उपयोगी सुझाव हैं जो पानी में काफ़ी समय बिताते हैं।)

कॉर्नियल अल्सर का एक और कारण हर्पीज़ सिम्प्लेक्स वायरस का संक्रमण (ऑक्युलर हर्पीज़) है, जो आंख की सतह की बाहरी सतहों, और कभी-कभी तो और गहरी सतहों को नुकसान पहुंचा सकता है।

कॉर्नियल अल्सर के अन्य मूल कारण हैं गंभीर रूप से आंखों में सूखापन, आंखों की एलर्जियां और व्यापक सामान्य संक्रमण। प्रतिरक्षा तंत्र के विकार और सूजनकारी रोग जैसे मल्टिपिल स्क्लेरोसिस और सोरायसिस भी कॉर्नियल अल्सर का कारण बन सकते हैं।

कॉर्नियल अल्सर का मूल्यांकन और उपचार

यदि आपको कॉर्नियल अल्सर होने का संदेह है तो आपका सबसे महत्वपूर्ण कदम यह होगा कि किसी नेत्र देखभाल पेशेवर को दिखाएं। नहीं तो, अनुपचारित कॉर्नियल अल्सर के कारण दृष्टि की गंभीर हानि, यहां तक कि नेत्र हानि भी हो सकती है।.

यदि आपके डॉक्टर को संदेह हो कि जीवाणु आपके कॉर्नियल अल्सर का कारण हैं, तो उपचार में, शुरुआती कल्चर के साथ या उसके बिना, आमतौर पर बारंबार स्थानिक एंटीबायोटिक का उपयोग किया जाता है।.

अल्सर के स्थान और उसके आकार से कल्चर की आवश्यकता तय होती है। कई नेत्र देखभाल पेशेवर कॉर्नियल अल्सर से ग्रस्त रोगियों को हर एक से तीन दिन बाद देखते हैं, जो उनकी स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है।

यदि अल्सर कॉर्निया के मध्य में हुआ है, तो स्थिति को ठीक होने में आमतौर पर थोड़ा अधिक समय लगता है, और घाव के निशान पड़ जाने के कारण दृष्टि स्थायी तौर पर घट सकती है। दुर्भाग्य से, यदि स्थिति की जल्द पहचान और उपचार हो जाए तो भी स्थायी नुकसान और दृष्टि हानि हो सकती है।

यदि आपकी आंख को कोई आघात पहुंचा हो, तो आपके नेत्र देखभाल पेशेवर फ़ंगल केराटाइटिस के कारण अल्सर होने का संदेह कर सकते हैं, विशेष रूप से तब जब आपकी आंख की मुठभेड़ जैविक पदार्थों, जैसे किसी पेड़ की शाखा के जैविक पदार्थ से हुई हो।

इस प्रकार के कॉर्नियल अल्सर के अधिकतर मामलों में, आंख पहले से मौजूद स्थितियों, जैसे कोई प्रतिरक्षा विकार, के कारण पहले ही कमज़ोर या क्षतिग्रस्त होती है।

फ़ंगल केराटाइटिस की पहचान केवल विशेष रूप से स्टेन किए गए नमूनों या कल्चर के माइक्रोस्कोपिक मूल्यांकन द्वारा ही हो सकती है। इसके उपचारों में फ़ंगस-रोधी दवाएं शामिल हैं और कभी-कभी, अल्सर की तीव्रता पर निर्भर करते हुए, आंख में लगाने वाली और मुंह से ली जाने वाली, दोनों प्रकार की दवाओं का साथ-साथ उपयोग किया जाता है। उत्तम दृष्टि बची रहेगी या नहीं यह बात संक्रमण के स्तर पर निर्भर करती है।

जल्द पता चल जाने और उपचार करवाने के बावजूद, कॉर्नियल अल्सर के कुछ मामलों में कॉर्नियल प्रत्यारोपण (पेनेट्रेटिंग केराटोप्लास्टी) की ज़रूरत पड़ती है।

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