कंजंक्टिवाइटिस: बैक्टीरियल, वायरल, एलर्जी और अन्य प्रकार

Close-up of a woman with conjunctivitis (pink eye).
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कंजंक्टिवाइटिस (आँख आना) (या गुलाबी आंख) कंजाक्टीवा एक प्रकार का सूजन है – ट्रांसपेरेंट मुकौस मेम्ब्रेन (पारदर्शी श्लेष्म झिल्ली) जो आंख के सफेद हिस्से को कवर करती है ।

आंख में सूजन और लाल होना ही कंजंक्टिवाइटिस के संक्रामक के कारणों में जिनमें बैक्टीरिया, वायरस और कवक (फंगस) शामिल हैं । गैर-संक्रामक कारणों में एलर्जी, बाहरी शरीरिकी संक्रमण और रसायन शामिल हैं॰

वाक्यांश में कहें तो "गुलाबी आंख" आमतौर पर कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) को संदर्भित करने के लिए उपयोग किया जाता है, क्योंकि कंजाक्टीवा का गुलाबीपन या आँख की लाली सबसे अधिक ध्यान देने योग्य लक्षणों में से एक होता है ।

कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) के प्रकार :

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ)

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) गुलाबी आंख का एक सामान्य प्रकार है, जो बैक्टीरिया के कारण होता है और जो कनटामिनेसन (दूषितकरण) के विभिन्न स्रोतों के माध्यम से आंख को संक्रमित करता है । बैक्टीरिया एक-दूसरे के संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, दूषित सतहों के संपर्क में आने या फिर अन्य साधनों जैसे साइनस या कान में संक्रमण के माध्यम से फैल सकता है ।

एलर्जी कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) एक परिणाम हो सस्ता है जब आपकी आँखें एक पदार्थ का सामना करती हैं जिससे वे अत्यधिक संवेदनशील होते हैं जैसे कि हवा में पराग (पोलन) । 

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) का कारण बनने वाले सबसे आम प्रकार में स्टैफिलोकोकस ऑरियस, हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा, स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया और स्यूडोमोनस एरुगिनोसा शामिल हैं । बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) आमतौर पर आँख से मोटा डिस्चार्ज (निर्वहन) होना या  मवाद पैदा करता है और एक या दोनों आँखों को भी प्रभावित करता है ।

किसी भी जीवाणु संक्रमण की तरह, बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होती है । बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) का उपचार आमतौर पर टोपिकल (सामयिक) एंटीबायोटिक आई ड्रॉप और/या आंखों के ओइंटमेंट (मलहम) के साथ पूरा किया जाता है । संक्रमण की गंभीरता के आधार पर उपचार आमतौर पर एक से दो सप्ताह तक होता है ।

वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) गुलाबी आंख का एक और सामान्य प्रकार है जो अत्यधिक संक्रमित हो जाता है क्योंकि छींकने और खांसने से वायुजनित वायरस फैल सकते हैं । वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) आम वायरल ऊपरी श्वसन संक्रमण जैसे कि खसरा, फ्लू या सामान्य सर्दी के साथ भी हो सकता है ।

वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) आमतौर पर एक पानी  जैसे डिस्चार्ज (निर्वहन) को उत्पन करता है । आमतौर पर संक्रमण एक आंख में शुरू होता है और जल्दी से दूसरी आंख में फैल जाता है ।

बैक्टीरिया के संक्रमण के विपरीत, एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ काम नहीं करेंगे । कोई भी आई ड्रॉप या ओइंटमेंट (मलहम) आम वायरस के खिलाफ प्रभावी नहीं हैं जो वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) का कारण बनते हैं । लेकिन वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) स्व-सीमित है, जिसका अर्थ है कि यह थोड़े समय के बाद अपने आप ठीक हो जाएगा ।

आमतौर पर वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) के साथ, तीन दिन से पांच दिन तक सबसे खराब होते हैं । उसके बाद, आँखें अपने आप ही सुधारने लग जाती हैं ।

वायरल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) के उपचार में आमतौर पर सपोर्टिव थेरपीज़ (सहायक चिकित्सा) शामिल होती है, जैसे कि टोपिकल आई ड्रॉपस , जो लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं: उदाहरण के लिए, आंख को सफेद करने के लिए वैसोकॉन्स्ट्रिक्टर्स, सतह की सूजन को कम करने के लिए डीकोंगेस्टैंट और सामयिक खुजली को कम करने के लिए एंटीथिस्टेमाइंस काम करती है । संक्रमण की गंभीरता के आधार पर, उपचार आमतौर पर एक से दो सप्ताह तक जारी किया जाता है ।

गोनोकोकल और क्लैमाइडियल कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ)

आप गोनोरिया और क्लैमाइडिया सहित यौन संचारित रोगों के संक्रमण से गुलाबी आंख प्राप्त कर सकते हैं । नवजात शिशुओं को तब उजागर किया जा सकता है जब वे संक्रमित मां की जन्म देने वाली नलिका से गुजरते हैं ।

ट्रेकोमा (रोहें) क्लैमाइडियल संक्रमण का एक रूप है जो आंख की सतह पर निशान का कारण बनता है । ट्रैकोमा (रोहें) दुनिया में रोके जाने वाले दृष्टिविहीनता (ब्लाईंडनेस) का एक प्रमुख कारण है ।

यदि आप गर्भवती हैं और संदेह है कि आपको यौन संचारित रोग हो सकता है, तो आपको अपने बच्चे के जन्म से पहले किसी भी संक्रमण के लिए जाँच और उपचार की अति आवश्यकता है ।

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ)

आंखों की एलर्जी के कारण होने वाली यह गुलाबी आंख होना आम बात है । आंखों की एलर्जी, अन्य प्रकारों की तरह, पोल्लेन (पराग), जानवरों की रूसी (डेंडर) और धूल के घुन सहित एलर्जी से उत्पन्न हो सकती है ।

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) का सबसे आम लक्षण खुजली वाली आंखें हैं, जो एलर्जी प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए एंटीहिस्टामाइनस युक्त विशेष आंखों की ड्राप से छुटकारा पा सकती हैं ।

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) के उपचार में एलर्जीन से बचना भी महत्वपूर्ण है । एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) मौसमी या वर्ष के दौरान भी हो सकती है, जो एलर्जी के कारण प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है ।

विशाल पैपिलरी कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) (GPC)

यह गुलाबी आंख आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करती है और अधिकतर सॉफ्ट(नरम) कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को प्रभावित करती है । इस स्थिति से कॉन्टैक्ट लेंस इन्टोलेरेंस(असहिष्णुता), खुज़ली, भारी डिस्चार्ज (निर्वहन), आंखों में पानी आना और पलकों के नीचे लाल बुम्प्स के कारण हो सकता है ।

आपको कम से कम थोड़ी देर के लिए अपने कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से रोकना होगा । आपका नेत्र चिकित्सक यह भी सलाह दे सकता है कि आप एक अलग प्रकार के संपर्क लेंस पर स्विच करें, जिससे कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) के वापस आने की संभावना कम हो सके ।

गैर-संक्रामक कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ)

यह कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) आंखों की जलन से गुलाबी आंख के लक्षणों का कारण बनता है जो कई स्रोतों से हो सकता है, जिसमें धूम्रपान, डीजल का धुआं, इत्र और कुछ रसायन पदार्थ शामिल होते हैं । कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) के कुछ रूपों में संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप कुछ इन्जस्टेड (अंतर्ग्रहण) पदार्थ भी होते हैं, जिनमें आईब्राइट और टरमेरिक (हल्दी) जैसी जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं ।

विशाल पैपिलरी कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) सहित गुलाबी आंख के कुछ रूप, आंख की प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं के कारण हो सकते हैं, जैसे कि कॉन्टैक्ट लेंस या ओकुलर प्रोस्थेटिक्स (आर्टीफिसियल कृत्रिम आंख) पहनने की प्रतिक्रिया । आई ड्रॉप या ओइंटमेंट (मलहम) में संरक्षक के लिए एक प्रतिक्रिया भी टॉक्सिक (विषाक्त) कंजंक्टिवाइटिस (नेत्रश्लेष्मलाशोथ) पैदा कर सकता है ।

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