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नवजात शिशुओं की दृष्टि समस्याओं के लिए बच्चों के चश्मे

नवजात शिशुओं को जन्म के कुछ समय बाद ही किसी वस्तु पर नज़र टिकाने में (अपनी नज़र एक जगह "लॉक" करने में), और 3 माह का होते-होते चलायमान वस्तुओं का पीछा करने में समर्थ हो जाना चाहिए।

आपका शिशु इन शुरुआती पड़ावों तक पहुंच गया है या नहीं यह जानने के लिए आप किसी खिलौने या उजले रंग वाली वस्तु का उपयोग कर सकते हैं।

फ़ोकस करने की योग्यता, रंगों को देख पाने, और गहराई समझ पाने के मामले में शिशुओं को 6 माह का होते-होते वयस्कों के समान देख पाने में समर्थ हो जाना चाहिए। घर पर इसकी पहचान कर पाना थोड़ा मुश्किल है।

आपके आंखों के डॉक्टर संभवतः कुछ साधारण से परीक्षण करेंगे जिनके लिए आई चार्ट को पढ़ने की ज़रूरत नहीं होती है।.

उदाहरण के लिए, पुतली की प्रतिक्रियाओं के परीक्षण से पता चलता है कि आंखों की पुतलियां प्रकाश की उपस्थिति में ठीक से संकुचित होती (सिकुड़ती) और प्रकाश की उपस्थिति में विस्तारित होती (फैलती) हैं या नहीं। "फ़िक्सेट एंड फ़ॉलो" परीक्षण यह पता लगाता है कि आपके शिशु की आंखें किसी वस्तु पर टिकने, और उसके चलने पर उसका पीछा करने में सक्षम हैं या नहीं।

प्रेफ़रेंशियल लुकिंग नामक एक अन्य महत्वपूर्ण परीक्षण यह पता लगाता है कि आपके शिशु में कोई दृष्टि संबंधी समस्या है या नहीं। इसमें ऐसे कार्डों का उपयोग किया जाता है जो एक तरफ़ खाली और दूसरी तरफ़ पट्टीदार होते हैं (हर कार्ड पर अलग चौड़ाई और/या अलग कॉन्ट्रास्ट वाली पट्टियां होती हैं) और इनसे नवजात शिशु की दृष्टि को पट्टियों की ओर आकर्षित किया जाता है।

इन कार्डों का उपयोग करके आपके आंखों के डॉक्टर आपके शिशु की दृष्टि तीक्ष्णता (नज़र का पैनापन) किसी भी मौखिक फ़ीडबैक के बिना माप सकते हैं।

कहीं आपके शिशु को कोई दृष्टि संबंधी समस्या तो नहीं और उसे कहीं चश्मे की ज़रूरत तो नहीं, यह जानने के लिए बच्चे की आयु 6 माह हो जाने पर उसकी आंखों की जांच करवाएं।

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